चंडीगढ़ शिक्षा विभाग की गलतियों के कारण व चंडीगढ प्रशासन की इच्छाशक्ति की कमी से सैकड़ों डायरेक्ट कांट्रैक्ट ” ग्रुप डी” कर्मचारी पिछले 15, वर्षो से मजदूरी वेजिज पर अन्य बेनिफिट के बगैर नौकरी करने के लिए हो रहे मजबूर ।

कच्चे कर्मचारियों के बेनिफिट पर अफसरशाही भारी।।

चंडीगढ़ शिक्षा विभाग के हजारों ” ग्रुप डी” के डायरेक्ट डीसी रेट / आउटसोर्सिंग व मिड डे मील के कर्मचारियों व “आल कांटरैकचुअल कर्मचारी संघ भारत” पदाधिकारियों ने एकत्रित होकर जीएमसीएच 32, की सफाई कर्मचारी यूनियन के नवनिर्वाचित प्रधान श्री ओम कैलाश व उसकी टीम का जोरदार स्वागत करते हुए मस्जिद ग्राउंड सैक्टर 20, चंडीगढ़ में अपनी पैंडिगं मांगों को लेकर शिक्षा विभाग व चंडीगढ प्रशासन के विरुद्ध रोष प्रदर्शन किया ।

शिक्षा विभाग व चंडीगढ प्रशासन की कमियों का खामियाजा डायरेक्ट कांट्रैक्ट ” ग्रुप डी” के डीसी रेट कर्मचारियों को पड़ रहा भुगतना।

“क्लास फोर ईमपलाॅइज यूनियन एजुकेशन डिपार्टमैंट ” के प्रधान श्री अन्नु कुमार जी, ने बताया कि CLRA अधिनियम 1970 – 71, के श्रम कानून के खंड 25 (2) (v)(a) के अनुसार समान काम के लिए समान वेतन दिया जाना चाहिए जिसकी मांग ” ग्रुप डी” के डीसी रेट कर्मचारी पिछले 10, वर्षो से कर है ।

“आल कांटरैकचुअल कर्मचारी संघ भारत” के प्रधान श्री अशोक कुमार जी ने बताया कि उपायुक्त दर ( डी सी रेट ) एक दिहाड़ी ( wages ) है यह बारहमासी प्रकृति के कार्यों के लिए निर्धारित नही की गई थी , यह व्यवस्था एक दिन की मजदूरी मे समानता लाने के लिए अंग्रेजो के शासनकाल सन 1941 , में टेम्प्रेरी वर्क के लिए निर्धारित की गई थी ।इस व्यवस्था को बारहमासी प्रकृति के कार्यों में लोकहित कारी नहीं माना जा सकता है ।।

बारहमासी प्रकृति कार्यों को मधयनजर रखते हुए पी .जी .आई हॉस्पिटल में कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को CLRA अधिनियम 1970 – 71, के श्रम कानून के खंड 25 (2) (v)(a) के अनुसार समान काम के लिए समान वेतन बेसिक + डीऐ के रुप में सैलरी दे दी गई है ।
जब भारत सरकार और चंडीगढ प्रशासन पी जी आई आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को बेसिक + डीऐ के रुप में सैलरी दे सकता है तो शिक्षा विभाग और चंडीगढ़ प्रशासन ने अपने डायरेक्ट कांट्रैक्ट ” ग्रुप डी” के कर्मचारियों को भी बेसिक + डीऐ के तहत सैलरी मिलनी चाहिए।

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ठेकेदारी प्रथा के जरिए कर्मचारियों पर कुठाराघात ——-

आज़ादी के 75, वर्षो बाद भी सरकारी विभागों के बारहमासी प्रकृति के कार्यो में कार्यरत ” ग्रुप डी ” कामगारों को ठेकेदारी प्रथा की कैंसर जैसी घातक बिमारी की अधेंरी सुरंग में धकेल दिया जा रहा है ।

ठेकेदारी प्रथा के कार्यो में लगे कर्मियों के परिवारो का सर्वांगीणम् विकास नही हो पा रहा। क्योंकि बारहमासी प्रकृति कार्यों में ठेका प्रथा ने ” ग्रुप डी” के डायरेक्ट डीसी रेट व आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का स्थाई रोज़गार, समाजिक समानता तो छीनी ही है परन्तु आर्थिक रूप से दरिद्रता मे जीवन यापन करने पर भी मजबूर कर दिया गया है ।

चंडीगढ़ प्रशासन ने डेली वेज तथा हैडहोक कर्मचारियों के लिए वर्ष 2014-15 में सर्वोच्च न्यायालय के उमा देवी के निर्णय अनुसार दस साल की सेवा को नियमित करने की पॉलिसी बनाई । मगर डायरेक्ट डीसी रेट कर्मचारियों को समान कार्य समान वेतन तक नहीं दिया जा रहा है ।

भारतीय राज पत्र Extraordinry भाग 11 खण्ड उप खण्ड (11 ) Part ii Section 3 , sub Section (ii ) प्राधिकरण से प्रकाशित।
श्रम और रोजगार मंत्रालय अधिसूचना भारत साकार नई दिल्ली 9 , अक्टूबर 2018 ,

का . बा . 5188 (ब ) केंद्रीय सरकार , ठेका श्रम ( विनियमन और उत्पादन ) अधिनियम 1970 , ( 1970 का 37 ) की धारा – 31 , द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए ठेका कर्मकार , ठेका श्रम ( विनियमन और उत्पादन ) नियम 1971 , के खण्ड 25 ,के उपनियम (2 ) के खण्ड (v ) उप खण्ड (क ) के निबन्धानुसार सरकारी स्थापन में एक सामान कार्य निष्पादित्त करने वाले न्यूनतम संदत्त नियमित कर्मकार के सामान मजदूरी और अन्य सुविधाएं संदत्त की जाने की बात कही गई।

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बारहमासी प्रकृति के कार्यों को जहां सिर्फ स्त्री और पुरषों ही कार्य कर सकते हों ऐसे कार्यों को निजी एजेंसियो के हाथो में देना या आउट सोर्सिंग करना यह स्त्री और पुरषों की ” खरीद प्रोख्त ” माना जाता है जो भारतीय संविधान के आर्टिकल 13 , के अनुसार यह एक रूडी वादी व्यवस्था तथा अपराध है ।

यूनियन के महासचिव श्री जोनी जी का कहना है

शिक्षा विभाग में आउटसोर्सिंग के नए सृजित पदों के स्थान पर पात्र मिड – डे मील वर्करो को अर्जेस्ट किया जाए तथा मिड – डे मील किचन में भेजना बंद करें ।

शिक्षा विभाग के ” ग्रुप डी” डायरेक्ट डीसी रेट, व आउटसोर्सिंग तथा मिड – डे मील वर्करो ने अपनी पैंडिगं मांगों को लेकर पर हजारों कर्मचारियों ने शिक्षा विभाग व चंडीगढ प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया जिसमें “आल कांटरैकचुअल कर्मचारी संघ भारत” के चेयरमैन बिपिन शेर सिंह जी, महासचिव शिव मूरत यादव जी, सतीश जी,जनार्दन जी, (जेटीए) के प्रधान श्री रणबीर जोरार,जीएम सीएच 32, सफाई कर्मचारी यूनियन के प्रधान श्री ओम कैलास जी, श्री रमेश कुमार जी, सभी ने प्रदर्शन में भाग लेते हुए चंडीगढ शिक्षा विभाग के ” ग्रुप डी” डायरेक्ट डीसी रेट, व आउटसोर्सिंग तथा मिड – डे मील वर्करो की मागों को पूरा करवाने के लिए समर्थन किया।

जारी कर्ता :

अन्नु कुमार, प्रधान
जोनी कुमार , महासचिव
पाल सिंह, चेयरमैन

“क्लास फोर ईमपलाॅइज यूनियन एजुकेशन डिपार्टमैंट (रजि0) ” यूटी  चंडीगढ़।।

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